नित्य समाचार👁👁
*🌐अखबार में खाना लपेटकर खाना सेहत के लिए ख़तरनाक है—यह बात FSSAI )) भी कहती है। अखबार की स्याही में मौजूद केमिकल , भारी धातुएँ और टॉक्सिक इंक सीधे खाने में घुल जाते हैं और शरीर में जहर की तरह काम करते हैं। यह चेतावनी नई नहीं है, न ही विज्ञान को लेकर कोई बहस है—खतरा साफ और साबित है।*
*लेकिन सवाल यह है कि FSSAI India के अधिकारी आखिर कब जागेंगे? क्या सिर्फ़ बयान जारी करना ही फूड सेफ्टी है? ढाबों, ठेलों , होटलों और पैकेजिंग यूनिट्स में आज भी खुलेआम अखबार , रीसायकल पेपर और गंदे रैपर इस्तेमाल हो रहे हैं। न ज़मीनी निगरानी, न सख़्त कार्रवाई , न जुर्माने का डर सब कुछ राम भरोसे छोड़ दिया गया है।*
*क्या FSSAI के अफसर कुंभकरणी नींद से तब उठेंगे जब आधा भारत कैंसर, लीवर फेल्योर और पेट की बीमारियों से भर जाएगा? जब चेतावनी पहले से मौजूद है तो रोकथाम क्यों नहीं? यह लापरवाही नहीं, जनता की सेहत के साथ अपराध है।*
*नियम बनाकर भूल जाना रेगुलेशन नहीं होता ज़िम्मेदारी निभानी पड़ती है, वरना इसका खामियाज़ा आम आदमी अपनी जान देकर चुकाता है।*

