डीके सिंह// नित्य समाचार (तहसील अध्यक्ष:- ग्रामीण पत्र एसोसिएशन उत्तर प्रदेश
*रामपुर / सैदनगर,*
उत्तर प्रदेश सरकार की ट्रांसफर नीति को विकास खंड सैदनगर में खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। मामला ग्राम पंचायत सचिव अनुज शर्मा का है। विभागीय सूत्रों के अनुसार सचिव अनुज शर्मा लगभग 2 वर्ष तक बिना किसी सूचना के अपनी ड्यूटी से गायब रहे थे। इस गंभीर अनुशासनहीनता के चलते विभाग द्वारा उन्हें निलंबित (सस्पेंड) भी किया गया था।
लेकिन हैरानी की बात है कि निलंबन के कुछ समय बाद ही उन्हें बहाल करके फिर से उसी ब्लॉक सैदनगर में तैनात कर दिया गया। उत्तर प्रदेश शासन के स्पष्ट आदेश हैं कि किसी भी पटल सहायक / सचिव को एक ही ब्लॉक में 3 वर्ष से अधिक नहीं रखा जाएगा। लेकिन सचिव अनुज शर्मा पिछले 8 वर्षों से लगातार विकास खंड सैदनगर में ही जमे हुए हैं। इससे विभाग में उनके रसूख और मिलीभगत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
*एक साथ दो-दो पद, हितों का टकराव:*
अब तो हद ही हो गई है। 2 साल तक गायब रहने वाले सचिव को विभाग ने एडीओ पंचायत का अतिरिक्त चार्ज भी दे दिया है। वर्तमान में अनुज शर्मा ग्राम पंचायत सचिव के अपने मूल पद के साथ-साथ एडीओ पंचायत के पद का भी कार्य देख रहे हैं।
एडीओ पंचायत को सचिवों के कार्यों की जांच करनी होती है। ऐसे में जब एक सचिव ही एडीओ पंचायत बन जाएगा तो वह अपने ही संवर्ग के कर्मचारियों की निष्पक्ष जांच कैसे करेगा। यह सीधे-सीधे हितों के टकराव का मामला है।
क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि एक ही व्यक्ति के इतने लंबे समय तक एक ही ब्लॉक में जमे रहने से विकास कार्यों में पारदर्शिता खत्म हो गई है। लोगों ने मांग की है कि:
सचिव अनुज शर्मा के 2 वर्ष तक गायब रहने और उसके बाद बहाली की पूरी पत्रावली सार्वजनिक की जाए।
शासन की ट्रांसफर नीति के तहत उन्हें तत्काल जनपद से बाहर ट्रांसफर किया जाए।
उनके पास से एडीओ पंचायत का अतिरिक्त चार्ज तुरंत वापस लेकर किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी को दिया जाए।
पिछले 8 वर्षों में उनके कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों का विशेष ऑडिट कराया जाए।

