तहसील बिलासपुर में धान खरीद केंद्रों पर कांटों के प्रभारियों पर लगाए किसानों ने रिश्वतखोरी के आरोप 


जिला रामपुर:-🇮🇳🇮🇳

नित्य समाचार👁👁

प्रधान संपादक डीके सिंह🙏🙏

मंडी अधिकारी व व्यापारियों में गठजोड़ से बिलासपुर तहसील में धान खरीद बिचौलियों के हवाले है। सिस्टम में खामियों की वजह से क्रय केंद्रों पर अधिक धान की खरीद दलालों के माध्यम से हो रही है। कहीं कर्मचारियों की कमी तो कहीं पंखे की खराबी तो कहीं केंद्र प्रभारी बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी पर चले  जाने से धान खरीद प्रभावित है। इसका मंडी व्यापारी जमकर फायदा उठा रहे हैं। मंडी में खूब धान खरीदा जा रहा है। एक केंद्र प्रभारी का तो बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी पर जाना और अपने निजी कार्य को करने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है

तहसील बिलासपुर के अन्तर्गत आने वाले ज्यादातर धान क्रय केंद्रों पर केन्द्र प्रभारियों के अलावा किसी अन्य की तैनाती नही है। जिस कारण किसानों पर दोहरा चार्ज भारी पड़ रहा है। इन क्रय केंद्रों पर बिचौलियों का बोलबाला है। कुछ केन्द्रों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर केन्द्रों पर धान साफ करने वाला पंखा कई दिनों से खराब पड़ा बताया जा रहा है। किसान केंद्र पर धान लाकर स्वयं साफ करता है, जनरेटर का तेल और तो तुलाई करने के लिए मजदूरों को भी  किसानो को ही लाना पड़ता है तब कहीं जाकर उसके धान की खरीद की जाती है। हालांकि धान खरीद में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए  उच्च अधिकारी कई बार केंद्र प्रभारी को निर्देश दे चुके है। इसके बावजूद केंद्र प्रभारी पूरी शिद्दत से जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं।

मुख्य मामले और आरोप:

👉रिश्वतखोरी और खराब धान खरीदना: कई जगहों पर, केंद्र प्रभारी किसानों से खराब गुणवत्ता वाले धान को स्वीकार करने या जल्दी तौल के लिए रिश्वत मांगते हैं।  जिला रामपुर की तहसील बिलासपुर और कस्बा कैमरी में केंद्र प्रभारी किसानों स ₹100 से 150 रुपए तक और मजदूरी के ₹40 से ₹50 तक रिश्वत लेते हैं

वजन में हेराफेरी (कांटों में गड़बड़ी): किसानों ने शिकायत की है कि खरीद केंद्रों पर कांटों में धांधली की जाती है और उन्हें उनकी उपज का सही वजन नहीं मिलता है

बिना किसान के नाम पर खरीद: उत्तर प्रदेश के  जिलों  रामपुर  की तहसील बिलासपुर कस्बा कैमरी मे  केंद्र प्रभारी से मिलकर  व्यापारी फर्जी  किसानों के नाम पर  धान  तुलवाकर  भुगतान करवा रहे हैं जिसमें आधार और मोबाइल नंबरों का गलत इस्तेमाल किया गया।

आढ़तियों से मिलीभगत: कुछ मामलों में, केंद्र प्रभारी सरकारी दर पर किसानों का धान खरीदने से इनकार कर देते हैं और किसान परेशान होकर आढ़तियों (निजी व्यापारियों) को कम दाम पर धान बेचने के लिए मजबूर  हो जाता है, और किसान के उसी धान को आढ़तियों के  माध्यम से सरकारी केंद्र पर केंद्र प्रभारी आसानी से तोल देते हैं

 

इससे पता चलता है कि धान खरीद प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जिससे किसान प्रभावित होते हैं।


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