नित्य समाचार👁👁
अयोध्या।
निर्मला हॉस्पिटल में इलाज के दौरान दवा के ओवरडोज से महिला की मौत के मामले ने नया और सनसनीखेज मामला आया सामने। पूरे मामले को लेकर MIA के सदस्यों के साथ निर्मला हॉस्पिटल के मालिक डॉ. बनौधा ने शहर के एक होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया।
हालांकि, महिला की मौत के बाद हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा लिखित रूप से ओवरडोज दिए जाने की बात स्वीकार किए जाने का मामला पहले ही सामने आ चुका है। ऐसे में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए बयानों पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि डॉ. बनौधा की ओर से मीडिया को दिए गए दस्तावेज़ों में ही बड़ा खेल उजागर हो गया। मैक्स हॉस्पिटल के काग़ज़ात में मरीज के एडमिशन डेट को लेकर भारी गड़बड़ी सामने आई है। वहीं, मैक्स हॉस्पिटल में मरीज के एडमिशन की तारीखों में भी बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है, जिससे पूरे इलाज की प्रक्रिया और रेफरल सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अयोध्या जनपद में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों की भूमिका भी अब जांच के घेरे में है। होटल में पत्रकारों को बुलाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए मामले को मैनेज करने की कोशिश का आरोप।
अब सवाल यह है कि
निर्मला हॉस्पिटल में बेसमेंट में संचालित हो रहा आईसीयू को सीएमओ अयोध्या ने किया है सील।
अगर ओवरडोज नहीं दिया गया, तो लिखित स्वीकारोक्ति क्यों?
एडमिशन डेट में हेराफेरी किसके इशारे पर?
मैक्स हॉस्पिटल की भूमिका क्या सिर्फ इलाज की थी या काग़ज़ी खेल का भी हिस्सा?
मामले ने तूल पकड़ लिया है और अब स्वास्थ्य विभाग व प्रशासनिक जांच की मांग तेज़ हो गई है।
अयोध्या में यह प्रकरण पूरे मेडिकल सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

