बिलासपुर के नोटरी एडवोकेट अजय सक्सेना पर फर्जी एफिडेविट बनाने का आरोप, दिल्ली पुलिस कर रही जांच


दिल्ली:-

दिल्ली पुलिस ने हाल ही में एक नोटरी और एडवोकेट के विरुद्ध फर्जी एफिडेविट तैयार करने के आरोप में जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने उनके ऑफिस से सभी संबंधित दस्तावेजों और रजिस्टर को जब्त कर लिया है, जिनकी गहनता से जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी नोटरी एडवोकेट के खिलाफ बिलासपुर  जिला रामपुर यू0 पी 0 के थाने में जालसाजी और फर्जीवाड़े के मामले में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। नोटरी एक्ट 1952 के तहत, नोटरी द्वारा किए गए सभी दस्तावेजों में सच्चाई और प्रामाणिकता सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है। इस कानून के अनुसार, नोटरी को जनता के हितों की रक्षा करनी चाहिए और गलत जानकारी या झूठे शपथ पत्र जारी करने से बचना चाहिए। अजय सक्सैना पर आरोप है कि उन्होंने इस अधिनियम का उल्लंघन करते हुए फर्जी एफिडेविट बनाए हैं, जो कानून की दृष्टि में अपराध की श्रेणी में आता है।वहीं, एडवोकेट एक्ट 1961 के अंतर्गत एक वकील की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने पेशे के प्रति ईमानदार रहे और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करे। इस अधिनियम के अनुसार, किसी भी वकील का झूठे दस्तावेज तैयार करना कानूनन जुर्म है। नोटरी एडवोकेट के इस आचरण से एडवोकेट एक्ट का भी सीधा उल्लंघन माना जा रहा है, जिससे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव है।इसके अतिरिक्त, नोटरी एडवोकेट पर बिलासपुर में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से पक्का निर्माण कर कब्जा करने का भी आरोप है। सरकारी भूमि पर कब्जा करना भूमि अधिनियम का सीधा उल्लंघन है और इसके खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में उनके खिलाफ पहले भी कई बार शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं, लेकिन अब पुलिस की कार्रवाई से इस मामले में सख्त कदम उठाए जाने की संभावना है।दिल्ली पुलिस का कहना है कि सभी दस्तावेजों की गहनता से जांच की जा रही है और नोटरी एडवोकेट के रजिस्टर का अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि फर्जीवाड़े के प्रमाण पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे उनकी नोटरी और वकालत की लाइसेंस भी रद्द हो सकती है।


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