जनपद रामपुर 🇮🇳🇮🇳
नित्य समाचार👁👁
रामपुर रज़ा पुस्तकालय परिसर में विभिन्न महत्वपूर्ण सलाहकार समितियों—संस्कृत सलाहकार समिति, शैक्षणिक मामलों की सलाहकार समिति तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंध सलाहकार समिति की बैठकों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। सभी बैठकों की अध्यक्षता पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र जी द्वारा की गई।
इन बैठकों का समग्र उद्देश्य पुस्तकालय को एक विश्वस्तरीय शैक्षणिक, शोध एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना, संस्कृत सहित विभिन्न भाषाओं की समृद्ध विरासत का संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग को सुदृढ़ बनाना है।
इस अवसर पर पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने अपने वक्तव्य में कहा कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय अपनी समृद्ध सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत के लिए विश्वविख्यात है। संस्कृत सहित हमारी बहुभाषी ज्ञान परंपरा को संरक्षित एवं सशक्त बनाना हमारी प्राथमिकता है। इन बैठकों के माध्यम से हम एक दीर्घकालिक एवं ठोस कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं, जिससे यह पुस्तकालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन, शोध एवं अनुवाद का एक अग्रणी केंद्र बन सके। उन्होंने आगे कहा कि समिति के सुझावों के आधार पर शीघ्र ही विभिन्न योजनाओं को क्रियान्वित किया जाएगा, जिससे शोध, संरक्षण एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे तथा युवा पीढ़ी में भारतीय भाषाओं और विरासत के प्रति रुचि बढ़ेगी। साथ ही बताया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने रामपुर रज़ा पुस्तकालय को ‘विश्वस्तरीय अध्ययन एवं अनुवाद संस्थान’ के रूप में विकसित करने के हमारे संकल्प की सराहना की है।
संस्कृत सलाहकार समिति की बैठक में पुस्तकालय में संस्कृत अध्ययन, संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार को नई दिशा देने हेतु ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर विचार किया गया। इस क्रम में संस्कृत अध्ययन केंद्र की स्थापना, संस्कृत अनुभाग के सुदृढ़ीकरण, पांडुलिपियों के संपादन, अनुवाद एवं प्रकाशन, तथा सेमिनार, सम्मेलन एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी। साथ ही, संस्कृत विद्वानों के लिए अनुसंधान, अध्ययन एवं आवश्यक शैक्षणिक सुविधाओं के विकास पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
शैक्षणिक मामलों से संबंधित सलाहकार समिति की बैठक में पुस्तकालय को “विश्व स्तरीय अध्ययन एवं अनुवाद केंद्र” के रूप में विकसित करने की दिशा में विस्तृत रणनीति पर चर्चा की गई। संस्कृत ,फारसी, अरबी, उर्दू एवं हिंदी भाषाओं की दुर्लभ पांडुलिपियों के लिए विशेष अनुवाद केंद्र की स्थापना, शोधार्थियों के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन तथा पुरस्कारों के मानदंड निर्धारित करने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए।
अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंध सलाहकार समिति की बैठक में पुस्तकालय की वैश्विक पहचान को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया। इस संदर्भ में पांडुलिपियों एवं अभिलेखीय सामग्री के तीव्र डिजिटलीकरण, आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं ऑनलाइन कैटलॉग के विकास, अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों के साथ साझेदारी, विदेशी विद्वानों हेतु फेलोशिप कार्यक्रम तथा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग स्थापित करने के प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, पुस्तकालय को मध्य एशियाई अध्ययन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया।
तीनों बैठकों में यह सर्वसम्मति रही कि पुस्तकालय में उपलब्ध दुर्लभ पांडुलिपियों एवं ग्रंथों के संरक्षण, वर्गीकरण, डिजिटलीकरण तथा शोधार्थियों के लिए उनकी सुलभता सुनिश्चित करने हेतु आधुनिक तकनीक एवं मानकों का उपयोग किया जाएगा।
संस्कृत सलाहकार समिति में प्रो. श्रीनिवास वारखेड़ी (कुलपति, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली), प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी (वरिष्ठ प्रोफेसर, पारंपरिक हिन्दू वास्तुकला विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली), प्रो. विनय कुमार पांडेय (प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, ज्योतिष विभाग, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी), प्रो. बलराम शुक्ल (प्रोफेसर, संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय) तथा प्रो. अंजु सेठ (सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं पूर्व प्राचार्य, सत्यवती कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय) शामिल रहे।
शैक्षणिक कार्य (एकेडमिक अफेयर्स) सलाहकार समिति में प्रो. हीरामन तिवारी (प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, ऐतिहासिक अध्ययन केंद्र, जेएनयू, नई दिल्ली), डॉ. के. के. मुहम्मद (पूर्व क्षेत्रीय निदेशक, उत्तरी क्षेत्र, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, केरल), प्रो. अमित कुमार शर्मा (प्रोफेसर, समाजशास्त्र , जेएनयू, नई दिल्ली), प्रो. जावेद अहमद दार (प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, कश्मीर विश्वविद्यालय, श्रीनगर) तथा प्रो. मनीष कुमार वर्मा (डीन, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ) शामिल रहे।
अंतरराष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक संबंध सलाहकार समिति में दीपक सिंघल (सेवानिवृत्त आईएएस, पूर्व मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार), प्रो. रमाकांत द्विवेदी (अध्यक्ष, एमईआरआई सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज़, नई दिल्ली), डॉ. रविकांत मिश्रा (संयुक्त निदेशक, प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय, नई दिल्ली), प्रो. नलिन कुमार मोहपात्रा (प्रोफेसर, रूसी एवं मध्य एशियाई अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली) तथा डॉ. हरि कृष्ण शर्मा (सहायक प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, लेडी श्री राम कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय) शामिल रहे। प्रस्तुत प्रस्तावों को अनुमोदित किया गया।

