नित्य समाचार*रामपुर।* दीपावली का पर्व खुशियों, रोशनी और उल्लास का संदेश लेकर आता है। इस पर्व को मनाते समय यह भी जरूरी है कि हमारी खुशियां किसी बेजुबान पशु या पक्षी के लिए भय और पीड़ा का कारण न बनें।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अश्विनी कुमार चतुर्वेदी ने जनपदवासियों से दीपावली के दौरान पशु-पक्षियों की सुरक्षा और उनके प्रति संवेदनशील रहने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि दीपावली पर होने वाली तेज आतिशबाजी और पटाखों के धमाकों से पशु-पक्षी भयभीत हो जाते हैं। तेज आवाज के कारण पालतू पशु बेचैन हो सकते हैं, जबकि खुले में रहने वाले पशु डरकर इधर-उधर भागने लगते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार भी हो सकते हैं। ऐसे में दीपोत्सव मनाते समय पशु-पक्षियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि किसी भी पशु के साथ शरारत या क्रूरता करना न केवल अमानवीय है, बल्कि कानूनन अपराध भी है। कई बार लोग मनोरंजन के लिए पशुओं को पटाखों से डराने या उन्हें नुकसान पहुंचाने जैसी हरकतें करते हैं। त्योहार की खुशियों में इस प्रकार के कृत्यों से बचना चाहिए और बच्चों को भी पशु-पक्षियों के प्रति दयालु एवं संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
जहां तक संभव हो तेज आवाज वाले पटाखों से बचें। पालतू पशुओं को आतिशबाजी वाले स्थानों से दूर सुरक्षित जगह पर रखें और उनके लिए शांत एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करें। बेसहारा पशुओं के आसपास पटाखे चलाने से भी बचें, ताकि वे भयभीत होकर सड़कों पर न भागें और किसी दुर्घटना का शिकार न हों। पशु-पक्षी भी हमारे पर्यावरण और जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि इस दीपावली घर-आंगन को दीपों की रोशनी से जगमगाएं और साथ ही यह संकल्प भी लें कि हमारी खुशियों से किसी बेजुबान पशु-पक्षी को भय या पीड़ा न पहुंचे। सुरक्षित और संवेदनशील दीपावली ही सच्चे अर्थों में खुशियों भरी दीपावली होगी।

